मौत पर कविता

मौत पर कविता


मौत पर कविता : 

दोस्तों मौत  वो दुखद घटना है जो कि कभी भी, कहीं भी ,किसी को भी  मिल सकती है | पता नहीं के मौत के 
बाद कैसा अनुभव होता है फिर भी इस मौत  से सब ही डरते हैं | यह अमीर- गरीब कुछ भी नहीं समझती 
है इसका जब मन करता है अचानक से चली आती है |  मौत पर कविता ही  हमारी आज की पोस्ट का शीर्षक है |



मौत है ऐसी दुखद घटना 
ना जाने ये कब आ जाए
इसके डर से तो सब जाने 
अच्छों- अच्छों की शामत आए

करे ना  इसकी कोई कल्पना
फिर भी होता इससे मिलना
जिसको होता यकीन जीवन पर
उसको ही यह चाहती छलना

आती है यह रूप बदलकर 
कभी होले से कभी डरा कर 
वख्त कभी भी यह ना देखे
इसकी मनमानी से मुश्किल बचना

ना जाने ये कहाँ ले जाए
अपनों से ये दूर कराये
बहुत बुरी यह लगती हमको 
फिर भी चेन की नींद सुलाये

कड़वा सच सबके जीवन का
एक दिन होता इसको आना
क्योंकि  नए जनम का प्रारम्भ 
मौत के बाद ही लिखा है होना 


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पिता और बेटे पर कविता" पिता बेटे की नोक -झोक "


पिता और बेटे पर कविता" पिता बेटे की नोक -झोक ":

पिता और बेटे पर कविता" पिता बेटे की नोक -झोक "
पिता और बेटे पर कविता" पिता बेटे की नोक -झोक "


एक तनाव सा क्यूँ है रहता
पिछली और अगली पीढ़ी में
हर बात का बतंगड़ बनता 
पिछली और अगली पीढ़ी में
बाप सलाह दे बेटा न माने
देता केवल बस ये ताने
s:आप क्या जानो नया जमाना ?
मुझको बड़ी- बड़ी सोसाइटी में जाना
क्या मैं भी पहनू आप की ही हरह 
केवल साल में चार ही जोड़े
हंसी उड़ेगी सब में मेरी 
क्या आप चाहोगे ये सब होने ?
f:पर बेटा तू इतना फिजूल खर्चता 
क्यों नहीं फ्युचर का कुछ सोचता ?
अब अपनी मम्मी पर ही चिल्ला पड़ता 
क्या यह तुझको शोभा देता?
s:पापा आप भी तो हद करते हो 
दोस्तों संग एंजॉयमेंट को 
फिजूल खर्च कहते हो?
रात में थोड़ा लेट हो जाऊँ 
तो फोन कर -कर मुझे तंग करते हो|
f: चल में नहीं आज से फोन करूंगा
पर तुझसे ये वादा लूँगा कि 
ड्रिंक करके तुझे मैं कभी
कार चलाते हुए अब नहीं देखुंगा
तू सीट बेल्ट हमेशा पहन के रखेगा 
ड्राइव करते हुए किसी का फोन भी नहीं सुनेगा
s:ओके डेड्डी अब ऐसा ही होगा 
क्या अब आपके चेहरे पे स्माइल होगा ?
F:हंस कर फिर पापा ने माहोल को बदला
एक हांथ बेटे की कमर पर लगा दिया 
बोले " पिता होना तब तुझे भी पता चलेगा बेटा
          जब तू भी किसी का पापा बनेगा
         कितनी जिम्मेवारी है मुझ पर 
         तुझको भी यह एक दिन एहसास होगा "

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होली गीत "वृंदावन की कुंज गलिन में "

होली गीत "वृंदावन की कुंज गलिन में "

होली गीत "वृंदावन की कुंज गलिन में "


वृंदावन की कुंज गलिन में 
कान्हा कैसे है हुरदंग मचाए
राधा को मारे पिचकारी भर 
गोपियन को गुलाल लगाए
आज तो ना छोड़ेगो किसी को 
चाहे सुबह से रात भी हे जाए
अपने रंग मेँ रंग लेगा सभी को ऐसे 
फिर और किसी को भी ना रंग चढ़ पाये 
वृंदावन की कुंज गलिन में 
कान्हा कैसे है हुरदंग मचाए
बलदाऊ और ग्वाल बाल संग
कान्हा घरन-घरन मेँ जाए 
किसी की दाड़ी लाल करत है ,
और किसी की साड़ी धानी कर जाए
आज कृष्ण की प्रीत को नशा चढ़ो है 
बिन घुंगरू हैं सब झूमे जाएँ 
देखो ये श्याम की महिमा आज 
सतरंगी प्रकृति का कण कण हे जाए 

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होली गीत "वृंदावन की कुंज गलिन में "